भारत की गिनती विश्व के प्राचीनतम सभ्य और सुसंस्कृत देशों में होती है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति का प्रसार दूर-दूर के देशों तक हुआ था। विश्व का पहला गणतंत्र (लिच्छवी) भारत में ही विकसित हुआ । विश्व की प्राचीन सिंधुघाटी सभ्यता अविभाज्य भारत की ही अंग थी। आज विश्व में सबसे बड़ा गणतंत्र भारत ही है। भारत ही विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसके नाम पर एक महासागर (हिंद महासागर) का नाम है। ज्ञान-विज्ञान और अध्यात्म के क्षेत्र में भारत जगद्गुरु कहलाया। यहाँ के वेदों और उपनिषदों का ज्ञान दूर-दूर तक फैला। महाभारत, रामायण एवं पंचतंत्र की कहानियाँ दूर देशों तक गईं। भगवान बुद्ध के उपदेश चतुर्दिक, अर्थात उत्तरी- दक्षिणी तथा पूर्वी-पश्चिमी देशों तक पहुँचे। गणितीय संख्याओं और दशमलव प्रणाली की जानकारी अरब देशों से होती हुई यूरोप तक गई। भारत के प्राचीन विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने के लिए तिब्बत, चीन, जापान और यूरोपीय देशों के विद्यार्थी आया करते थे। यही नहीं, स्थलमार्ग और समुद्रमार्ग से होकर भारत के गरम मसाले, सूती-रेशमी कपड़े आदि दूर देशों तक पहुँचाए जाते थे। भारत के भूगोल ने विश्व इतिहास के निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण योगदान किया है।
स्थिति
भौगोलिक दृष्टि से भारत का मुख्य भूभाग 8°4′ से 37°6′ उत्तर अक्षांश तथा 68°7′ से 97°25′ पूर्व देशांतर तक फैला है। 2004 के पूर्व इसका सबसे दक्षिणी छोर या दक्षिणतम बिंदु 6°4′ उत्तर अक्षांश पर स्थित था जो कि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का सबसे दक्षिणी छोर था और यह 2004 में सुनामी लहरों के चलते जलमग्न हो गया है। यह इंदिरा प्वाइंट (Indira Point) कहलाता था। यह विषुवत रेखा से लगभग साढ़े छह सौ किलोमीटर उत्तर है। इससे कुछ ही दूरी पर इंडोनेशिया का सुमात्रा द्वीप स्थित है। कर्क रेखा (23°30′ उत्तर अक्षांश) इस देश को दो समान भागों में बाँट देती है। भारत का सबसे उत्तरी सिरा 37°6′ उत्तर अक्षांश पर है जो कश्मीर के उत्तरी छोर पर पड़ता है और दक्षिणतम छोर 8°4′ उत्तर अक्षांश पर है जो तमिलनाडु राज्य की कन्याकुमारी पर पड़ता है। इस प्रकार, उत्तर और दक्षिण के अक्षांशों में लगभग 30° अक्षांशों का अंतर है। इसी प्रकार, भारत की देशांतरीय स्थिति 68°7′ पूर्व से 97°25′ पूर्व देशांतर के बीच है जो क्रमशः गुजरात के पश्चिमी कच्छ तथा अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी छोर पर पड़ती है। इसके पूर्व से पश्चिम के देशांतरों में लगभग 30° देशांतर का अंतर है।
विस्तार
भारत एक विस्तृत देश है। इसके उत्तरी सिरे से 22° उत्तर अक्षांश तक पूर्वी-पश्चिमी विस्तार बढ़ता गया है। इसका सबसे अधिक विस्तार (2,933 किलोमीटर) लगभग 22° उत्तर अक्षांश पर मिलता है। 22° उत्तर अक्षांश से दक्षिण की ओर बढ़ने पर इसका पूर्वी – पश्चिमी विस्तार घटता गया है। दक्षिणतम में पहुँचने पर यह एक बिंदु के रूप में मिलता है, जहाँ बंगाल की खाड़ी, अरब सागर एवं हिंद महासागर का मिलन हुआ है। यह नुकीला बिंदु अंतरीप का निर्माण करता है। समुद्र में स्थलीय भाग का निकला नुकीला भाग, जो तीन ओर से समुद्र से घिरा हो, अंतरीप कहलाता है। भारत के इसी दक्षिणी अंतरीप का नाम कुमारी अंतरीप है। भारत के उत्तरी छोर से इस छोर की दूरी 3,214 किलोमीटर है।
भारत की मुख्य भूमि की समुद्रतटीय सीमारेखा 6,100 किलोमीटर है। परंतु, भारतीय द्वीपों की तटीय सीमारेखा की लंबाई इसमें जोड़ने पर कुल तटीय सीमारेखा 7,516.6 किलोमीटर होती है। भारत की स्थल सीमारेखा 15,200 किलोमीटर है।
आकृति और आकार
भारत विश्व के सात विशाल देशों में एक है। इसका क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है। दुनिया का सातवाँ बड़ा देश होते हुए भी इसका क्षेत्रफल विश्व के स्थल भाग का मात्र 2.4% है।
| क्रम | विश्व के सातबड़े देशों का क्षेत्रफल विश्व के सात बड़े देश और | उनके क्षेत्रफल (लाखवर्ग किलोमीटर) |
| 1. |
रूस |
170.7 |
| 2. | कनाडा | 99.7 |
| 3. | सं० रा० अमेरिका | 98.0 |
| 4. | चीन | 95.9 |
| 5. | ब्राजील | 85.4 |
| 6. | ऑस्ट्रेलिया | 76.8 |
| 7. | भारत | 32.8 |
इस देश के दक्षिणी भाग की आकृति मोटे तौर पर त्रिभुजाकार है या अँगरेजी के वी (V) अक्षर के समान है जिसके पश्चिम में अरब सागर तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। इसका मध्य उत्तरी भाग चौड़ा है तथा बिलकुल उत्तरी भाग शरीर में सिर की स्थिति एवं आकार की तरह है। इसका दक्षिणी भाग लगभग 22° उत्तर अक्षांश से दक्षिण की ओर क्रमशः पतला होता गया है। यह भाग प्रायद्वीपीय भारत कहलाता है। मुख्य भूमि के दक्षिणी छोर पर भारत की आकृति अंतरीप की है जिसका नाम कुमारी अंतरीप या कन्याकुमारी है। भारत का प्रायद्वीपीय आकार तटीय सीमा का निर्माण करता है जो कि अत्यंत लंबी है और यह हिंद महासागर के उत्तरी भाग में है।
अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार का प्रभाव
भारत के अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार का प्रभाव तापमान, मौसम, समय आदि पर पड़ता है।
1. बढ़ते अक्षांश के अनुसार तापमान घटता जाता है, क्योंकि उसकी दूरी विषुवत रेखा से बढ़ती जाती है। विषुवत रेखा पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जबकि बढ़ते अक्षांश के साथ किरणें तिरछी होती जाती हैं। अतः, विषुवत रेखा का क्षेत्र अधिकतम गरम होता है और ध्रुवप्रदेश न्यूनतम गरम रहता है या बिलकुल ठंडा रहता है।
यही कारण है कि केरल और तमिलनाडु में, जो कि विषुवत रेखा के निकट हैं, सदा तापमान अधिक रहता है। जम्मू और कश्मीर एवं लद्दाख में, जो विषुवत रेखा से काफी दूर है, तापमान बहुत कम रहा करता है जिसका प्रभाव वहाँ की खेती, खान-पान, वेशभूषा, दिनचर्या आदि पर पड़ता है।
2. कर्क रेखा (23°30′ उत्तर अक्षांश) भारत के बीच से गुजरती है। इस रेखा के उत्तरवाले भूभाग में सूर्य की किरणें त कभी लंबवत नहीं पड़तीं। अतः, उत्तरी भाग शीतोष्ण क्षेत्र बन जाता है। कर्क रेखा के दक्षिणी भाग में सूर्य की किरणें HT किसी-न -न-किसी स्थान पर किसी समय लंबवत अवश्य पड़ती हैं। अतः, यह क्षेत्र उष्ण क्षेत्र के अंदर आ जाता है।
3. अक्षांशीय दूरी बढ़ने से दिन-रात की अवधि (लंबाई) में अंतर आता है। केरल एवं तमिलनाडु में जहाँ सबसे छोटे एवं सबसे बड़े दिन में 45 मिनट का अंतर आता है वहीं लेह में यह अंतर पाँच घंटे का हो जाता है।
4. देशांतरीय विस्तार का प्रभाव समय पर पड़ता है। देशांतर की दूरी ग्रीनविच (ब्रिटेन) से मापी जाती है। ज्यों-ज्यों पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं, समय बढ़ता जाता है। 15° देशांतरीय दूरी में लगभग 1 घंटे का अंतर आता है। इसी कारण अरुणाचल प्रदेश में जिस समय सूर्योदय होता है, उससे ठीक 2 घंटे बाद कच्छ (गुजरात) में सूर्योदय होता है। अतः 82°30′ पूर्व देशांतर रेखा को भारत का मानक याम्योत्तर (मानक देशांतर) माना जाता है जो कि उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर से गुजरती है ।
भारत और विश्व
भारत की स्थिति विश्व के प्रमुख महासागरीय व्यापारिक मार्ग पर है। इसका सबसे बड़ा लाभ विश्व के अधिकतम देशों से व्यापारिक संबंध जोड़ने में होता है। जैसे पूर्वी एशिया, दक्षिणी एशिया, अफ्रीका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से इस मार्ग द्वारा भारत व्यापारिक संबंध रखता है। एशिया एवं यूरोप से स्थलमार्ग द्वारा भी भारत का सांस्कृतिक एवं व्यापारिक संबंध रहा है। दक्षिण-पूर्व के द्वीपों तक आसानी से इस मार्ग से जाया जाता है। भारतीय नौकाएँ व्यापार के सामान के साथ यहाँ के विचार और दर्शन (ideas and philosophy) को दूर-दूर तक पहुँचाती रहीं। इससे पश्चिम के दूरस्थ देशों से भी संपर्क स्थापित हो सका। 1869 में स्वेज नहर के खुलने से भारत एवं यूरोप के बीच लगभग 7,000 किलोमीटर की दूरी कम हो गई।
भारत के पड़ोसी देश
जो देश भारत की सीमा (अंतरराष्ट्रीय सीमा) से सटे हुए हैं, वे इसके निकटतम पड़ोसी देश हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश ऐसे ही देश हैं। दक्षिण में श्रीलंका और मालदीव ये दोनों द्वीपीय पड़ोसी देश हैं। यानी, ये दोनों देश द्वीप रूप में अवस्थित हैं।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान भारत के पश्चिम में स्थित हैं। बांग्लादेश और म्यांमार पूर्व में हैं। नेपाल, भूटान और चीन की स्थिति उत्तर में है जबकि श्रीलंका और मालदीव दक्षिण में हैं। श्रीलंका भारत से मन्नार की खाड़ी और पाक जलसंधि द्वारा अलग होता है। पाकिस्तान और भारत के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमारेखा रेडक्लिफ लाइन कहलाती है। भारत और चीन के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमारेखा मैकमहोन लाइन कहलाती है।
भारत एवं इसके छह अन्य पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव) ने, जो कि दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित हैं, इस क्षेत्र के आर्थिक व अन्य तरह के विकास के लिए 8 दिसंबर 1985 को एक संगठन बनाया। इस संगठन का नाम दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Cooperation) है, जिसे सार्क (SAARC) भी कहा जाता है।
स्मरणीय तथ्य
● भारत की स्थिति हिंद महासागर के शीर्ष पर है।
• भारत विश्व का सातवाँ बड़ा देश है जिसका क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है।
• भारत 8°4′ उत्तर से 37°6′ उत्तर अक्षांशों के बीच और 68°7′ पूर्व से 97725° पूर्व देशांतरों के बीच स्थित है। कर्क रेखा इसके मध्य से होकर जाती है।
• भारत के दो द्वीप ‘अंडमान और निकोबार’ तथा ‘लक्षद्वीप’ है।
• बंगाल की खाड़ी में स्थित भारतीय द्वीप ‘अंडमान और निकोबार’ है।
• अरब सागर में स्थित भारतीय द्वीप ‘लक्षद्वीप’ है।
• कन्याकुमारी की स्थिति तीन सागरों के संगम पर है।
• भारतीय उपमहाद्वीप 7 पड़ोसी देशों से मिलकर बना है।
• भारतीय तटरेखा की लंबाई 7.516.6 किलोमीटर और स्थल सीमारेखा की लंबाई 15.200 किलोमीटर है।
• भारत पूर्णतया विषुवत रेखा के उत्तर, अर्थात उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है।